Maha Shivratri 2021 : Date, Puja Vidhi, Kyu Manate Hai?

Maha Shivratri 2021: 2021 की सुरुआत हो चुकी है और मार्च का महीना भी चल रहा है और इसी महीने शिवरात्रि भी है। आज हम बात करने वाले है शिवरात्रि की ।

आज हम जानेंगे…

शिवरात्रि कब है ? 

शिवरात्रि क्यों मनाई जाती है।

शिवरात्रि की पूजा विधि क्या है।

शिवरात्रि कब है ? 

आज हम ऐसे ही सवालो के जवाब देंगे आपको । चलिए जानते है कब है शिवरात्रि।
भारत देश मे शिवरात्रि 11 मार्च को मनाई जा रही है। बात करे विश्व की तो पूरे विश्व में शिवरात्रि 11 मार्च को मनाई जाएगी।

क्यों मनाई जाती है शिवरात्रि ?


शिवरात्रि से जुड़ी दो मुख्य कथाए है जो उत्तर भारत और दक्षिण भारत में प्रचलित है। उन दोनों कथाओ को हम आपको संछेप में बताने की कोसिस करेंगे।

महा शिवरात्रि से जुडी पहली कथा।

पहली कथा है जो शिव त्याग की कथा है शिव विवाह की कथा है । यह कथा रामचरितमानस और श्रीमद भगवत पुराड में भी यह कथा मिलती है।

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इस कथा के अनुसार एक बार शिव जी और पार्वती जी जा रहे थे तभी उन्होंने दण्डिका रड़ में राम और लक्ष्मण को देखा जो देवी सीता को ढूंढ रहे थे तभी संकर जी ने उन्हें प्रणाम किया और माँ सती को भ्रम हो गया कि “ऐसा कैसे हो सकता है कि निराकार भगवान साकार हो जाये और साकार हो भी गया तो अपने स्त्री को ढूंढ रहा है वह तो सर्वज्ञ है सर्व अंतरयामी है उसको तो मालूम होना चाहिए कि उसकी पत्नी कहा है। अस्तु यह भ्रम हो जाता है । संकर जो उन्हें समझाते है सती जी नही मानती तो शंकर जी कहते है परीक्षा लेलो ।

शंकर जी जब परीक्षा लेने को कहते है तो मा सती सीता जी का वेश धारण करके बैठ जाती है तभी राम जी उन्हें तुरंत पहचान लेते है और कहते है कि माताजी पिताजी कहा है यह वचन सुन कर माँ सीता को भ्रम हो जाता है फिर माता सीता चुप चाप शंकर जी के पास चली जाती है और जब माता सीता शंकर जी के पास वापस जाती है तो वह झूठ बोल देती है कि मैने राम की परीक्षा नही ली।

Maha Shivratri 2021:Shubh Muhurat and Puja Vidhi 2021

लेकिन शिव जी अंतरयामी वह जान जाते है कि यह मेरी माता सीता का वेश धारण करके गई थी परीक्षा लेने के लिए। शिवजी ने सोचा इन्होंने मेरी माता का स्वरूप धारण किया है अतैव इस जन्म में तो इनके साथ पति पत्नी का रिश्ता नही रह सकता इसलिए उन्होंने अपने मन ही मन मे सती को त्याग दिया।


बाद में सती जो को यह शंका हो ही गई की शिवजी ने उन्हें मन ही मन त्याग दिया है।
एक दिन जब दक्ष (सती के पिता ) वह यज्ञ करवा रहे थे लेकिन शिव जो को वह आमंत्रित नही किआ गया था सती जी जिद करने लगी शंकर जी से के में भी जाउंगी । तब शंकर जी ने उन्हें जाने दिया।

जब सती जी वहां गई तो उनकी बहनो ने जदा बात-चीत नही की लेकिन उनकी माता ने उनका आदर सत्कार किया।

जब सती जी यज्ञ में जाति है तो देखती है कि वहां शिवजी का आसन नही रहता । तब वह अपने पति का अपमान समझकर अपने आप को योग अग्नि में भस्म कर लेती है ।

इसके बाद स्वयं राम गए थे शंकर जी के पास और उन्होंने कहा जब प्रस्ताव आये शादी के लिए तो आप है कर दीजियेगा । फिर यही सती जी मा पार्वती का अवतार लेके आती है पिता हिम् नरेश और माता मैना के घर मे।

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उसके बाद फिर नोयोगशरो माँ पार्वती की परीक्षा लेते है तो पार्वती जी उनसे कहती है कि मैं यातो शिवजी से शादी करूँगी या अपना पूर्ण जीवन कुआरी ही रहूंगी।(maha shivratri 2021 date)

ऐसा जवाब मिल कर शिवजी के पास रिस्ता आया और रामजी के कहे अनुसार उन्होंने शादी के लिए हां कर दी। और जिस दिन शिवजी का विवाह हुआ वह दिन हम शिवरात्रि के पर्व में मनाते है |

महा शिवरात्रि से जुडी दूसरी कथा |

अब नो कथा दक्षिण भारत मे प्रचलित है वह कथा ऐसी है हर एक ब्राह्मण में एक ब्रह्मा , एक विष्णु और एक शंकर होते है तो अनन्त ब्राम्हण है तो अनंत ब्राम्हण में अनंत ब्रम्हा अनंत विष्णु और अनंत शंकर होते है ।

इन सभी अनंत ब्रम्हांडो के एक माहा विष्णु और एक सदा शिव होते है यह जो सदा शिव है यह सदा रहते है तो जब माह प्रलय होता है जिसमे समस्त ब्रम्हांड भगवान में लीन होते है तो वह सदा शिव में लीन हो जाते है ।

एक प्रसंग आता है जसमे ब्रह्मा जी और विष्णु जी के बीच चर्चा होती है कि हम मेसे बडा कोंन है तभी एक बहुत बड़ा खम्बा प्रकट हो जाता है तब ब्रम्हा जी ने कहा मैं इसका आदि देखता हूं और विष्णु जी ने कहा मैं इसका अंत देखता हूं ।

दोनों जाते है तो नातो किसी को आदि पता चलता है और नही अंत यह प्रक्रड महाशिवरात्रि के दिन हुआ था इसलिए महाशिवरात्रि का बड़ा महत्व है इस दिन कुछ भक्त लोग रात भर कीर्तन करते है तो कुछ भक्त लोग  उपवास करते है उपवास का अर्थ होता है ‘उप’ मतलब समीप(निकट) और ‘वास’ का मतलब होता है निवास …मतलब भगवान के निकट निवास करना।[3/10, 2:28 AM]

शिवरात्रि की पूजा विधि।

यह ऐसी पूजा विधि बताई गई है जो हर कोई कर सकता है ।पूजा विधि इस प्रकार है।
शिवरात्रि के दिन जल्दी उठ के स्नान करले इस दिन शिवजी का पूजन पंचामृत से किआ जाता है सबसे पहले पंजामृत से शिवलिंग का स्नान कराएं। पंचामृत न बनाये पाए तो जल चढाये।

जल चढ़ाते समय ॐ नमः शिवाय का जप करे स्नान के बाद चंदन का तिलक लगाएं तीन बेल पत्र , भांग धतूरा, फल और फूल वगेरे अर्पित करे।

माना जाता है कि शिवरात्रि के दिन चावल का भोग लगाना सबसे उत्तम होता है और चावल में केसर मिला दिया जाए तो यह शिव जी को बहुत प्रिय है । केसर युक्त खीर का भोग लगाएं और सभी मे बाटे ओर प्रसाद के रूप में ग्रहड़ करे। इस दिन मन ही मन शिव की आराधना करते रहे । कहते है भगवान शिव की आराधना करने से मन को शांति मिलती है और घर मे खुशियो का वास् होता हैं।

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